Monday, August 19, 2019

मेरी नज़रों के सामने से वक़्त गुज़र रहा था,
और मैं रोक नहीं पा रही थी l
चीज़ें बदल रही थी,
और मैं उनमे ढल नहीं पा रही थी l

Saturday, March 30, 2019

थोड़ा ठहरी तो साया भी नज़र नहीं आया,
अपनी उलझनों का कोई किनारा भी नज़र नहीं आया।
उलझनों भरा अंधेरा इतना गहरा था कि,
मुझे खुद में और अंधेरे में फर्क नज़र नहीं आया।

Sunday, March 3, 2019

अब माँ बुलाएगी तो भागुंगी नहीं.. माँ कि गोद में सर रखकर थोड़ा रुक जाऊंगी,
पापा कि ओर भी प्यार से देख थोड़ा थम जाएंगी।

किसी के कंधे पर सर रखकर रोने से पहले थोड़ा रुक जाऊंगी,
अब तो खिलखिला कर हंसने से पहले भी थोड़ा थम जाएंगी।

आज के बाद हर खुशी को कुछ देर रुककर जी जाऊंगी,
क्योंकि शायद कुछ दिन बाद यह सांसे रुक जाएगी और मैं थम जाऊंगी।

Tuesday, February 26, 2019

क्या रास्ता इतना धुंधला था,
कि उस पर चलना मुश्किल था।

या डर का साया इतना काला था,
कि आगे बढ़ना मुश्किल था।

Saturday, February 23, 2019

आज पहली बार चांद को घटते देखा है,
दिनों को क्षणों में गुजरते देखा है।

मन की असमंजस में खो कर,
दिन ब दिन खुद को नष्ट होते देखा है।

Monday, February 4, 2019

सर्वश्रेष्ठता के गुरुर में आज तो जी लोगे,
भविष्य में, अज्ञानता के आभास का कड़वा घुट क्या पी लोगे ?