चहरे कि चमक, आंखों का तेज़ और होंठों कि हंसी, इनकी आड में सपनों के टुटने कि आवाज़ क्या किसी ने सुनी ?
उनसे उस दिन एक आखरी बार मिल भी लेती तो क्या बदल जाता, जो खो गया था क्या वो एक बार फिर मिल वापस जाता ?
ख्यालों का दायरा इतना बड़ा था कि, इर्द गिर्द दीवारे चार थी फिर भी आसमान सामने खड़ा था।