Thursday, December 20, 2018

चहरे कि चमक, आंखों का तेज़ और होंठों कि हंसी,
इनकी आड में सपनों के टुटने कि आवाज़ क्या किसी ने सुनी ?

उनसे उस दिन एक आखरी बार मिल भी लेती तो क्या बदल जाता,
जो खो गया था क्या वो एक बार फिर मिल वापस जाता ?

Monday, December 10, 2018

ख्यालों का दायरा इतना बड़ा था कि,
इर्द गिर्द दीवारे चार थी
फिर भी आसमान सामने खड़ा था।