मृगतृष्णा की परछाई से क्यो अपना चेहरा छुपाते हो, भविष्य की त्यारी कर रहे हो या भविष्य से घबराते हो।
पहले 'माॅ' कहने पर जवाब 'हाॅ' में आता था, अब वो पुकार खाली चली जाती है।
जो हमें लगा कि वह भूल गए वो उन्हें याद रह गया, जो जुबान न कह सकी वह उन खतों का एक लफ्ज़ कह गया।
पुरानी यादों को अब खंगालकर करोगे ही क्या, जो ढूंढ रहे हो वह अब बचा है क्या?
शहर की चकाचौंध में चांदी की चमक कहीं खो गई, पायल की छनक "लोग क्या कहेंगे" के डर से एक कोने में दुबक कर सो गई।
तुम्हें छुकर गुज़र जाना इतना मुश्किल होगा इसकी खबर न थी, तन्हाइयों में भी तुम्हारा अहसास था और दिन में भी होश की खबर न थी।
मैंने जिसे प्यार से बांधने कि कोशिश की, वह बन्द पिंजरे का पंछी न था। उसकी मंजिल तो आसमानों में थी, वो ज़मिन पर रुकने वालो में से न था।