Monday, August 27, 2018

मृगतृष्णा की परछाई से क्यो अपना चेहरा छुपाते हो,
भविष्य की त्यारी कर रहे हो या भविष्य से घबराते हो।

पहले 'माॅ' कहने पर जवाब 'हाॅ'‌ में आता था,
अब वो पुकार खाली चली जाती है।

Friday, August 24, 2018

जो हमें लगा कि वह भूल गए वो उन्हें याद रह गया,
जो जुबान न कह सकी वह उन खतों का एक लफ्ज़ कह गया।

Monday, August 20, 2018

पुरानी यादों को अब खंगालकर करोगे ही क्या,
जो ढूंढ रहे हो वह अब बचा है क्या?

Thursday, August 16, 2018

शहर की चकाचौंध में चांदी की चमक कहीं खो गई,
पायल की छनक "लोग क्या कहेंगे" के डर से एक कोने में दुबक कर सो गई।

Wednesday, August 15, 2018

तुम्हें छुकर गुज़र जाना इतना मुश्किल होगा इसकी खबर न थी,
तन्हाइयों में भी तुम्हारा अहसास था और दिन में भी होश की खबर न थी।

Monday, August 13, 2018

मैंने जिसे प्यार से बांधने कि कोशिश की,
वह बन्द पिंजरे का पंछी न था।
उसकी मंजिल तो आसमानों में थी,
वो ज़मिन पर रुकने वालो में से न था।