Monday, August 13, 2018

मैंने जिसे प्यार से बांधने कि कोशिश की,
वह बन्द पिंजरे का पंछी न था।
उसकी मंजिल तो आसमानों में थी,
वो ज़मिन पर रुकने वालो में से न था।

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