जब यहां आई थी तब कमरे का एक कोना था,
और जाने-पहचाने लोग कम।
घर वापस जाने का उत्साह ज्यादा,
और यहां रहने का कम।
अब भी वही कमरे का एक कोना हैं,
और आज भी जाने-पहचाने लोग कम।
पर अब यहां ज्यादा रहती हु और वहां कम,
अब इसे ज्यादा घर कहती हु और "घर" को घर कम।