Sunday, November 11, 2018

जब यहां आई थी तब कमरे का एक कोना था,
और जाने-पहचाने लोग कम।

घर वापस जाने का उत्साह ज्यादा,
और यहां रहने का कम।

अब भी वही कमरे का एक कोना हैं,
और आज भी जाने-पहचाने लोग कम।

पर अब यहां ज्यादा रहती हु और वहां कम,
अब इसे ज्यादा घर कहती हु और "घर" को घर कम।

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